मीना कुमारी उर्फ माहजबीन बानो का जन्म 1 अगस्त 1933 को मुंबई के दादर इलाके में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था।

मीना कुमारी के पिता अली बख्श एक बेटे की उम्मीद लगाए बैठे थे,  बेटी का जन्म हुआ तो वो बर्दाश्त नहीं कर सके और वो चंद घंटों की बेटी को तुरंत अनाथाश्रम छोड़ आए

लेकिन जब पत्नी रो-रोकर हलकान हुई तो मजबूरन अली बख्श को बेटी मीना कुमारी को अनाथाश्रम से वापस लाना पड़ा था 

मीना कुमारी को पहली बार डायरेक्टर विजय भट्ट की फिल्म लेदर फेस (1939) में बाल कलाकार का काम मिला, जिसमे उन्हें  25 रुपए मिली थी

मीना को बतौर हीरोइन फिल्म बच्चों का खेल (1946) में काम मिला उस समय उनकी उम्र मात्र 13 साल की थीं.

मीना कुमारी फिल्म पाकीजा, साहिब बीवी और गुलाम, बैजू बावरा जैसी दर्जनों फिल्मों में नजर आईं वो इतनी खूबशूरत थी अगर उनका बाल भी टूटकर गिर जाए तो उनके चाहने वाले उसका ताबीज बनवा लिया करते थे

फिल्मी चकाचौंध में रहने वाली मीना कुमारी की जिंदगी इस कदर लड़खड़ाई की उन्होंने शराब को ही सुकून का जरिया बना लिया।

मीना कुमारी की आखरी फिल्म पाकीजा थी, जो 4 फरवरी 1972 को रिलीज़ हुई थी

लगातार शराब का सेवन करने के कारण मीना कुमारी बहुत ज्यादा बीमार रहने लगीं। 1968 में मीना कुमारी को लिवर सिरोसिस का पता चला था

लगातार बीमार रहने के कारण मीना तीन दिनों तक कोमा में थी, कोमा में रहते हुए ही उनकी 31 मार्च 1972 को मौत हो गई। आज मीना कुमारी की 52वीं डेथ एनिवर्सरी है

मीना कुमारी एकलौती अभिनेत्री थी जिन्हें निधन के बाद फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमिनेशन दिया गया था.