अमिताभ, आमिर, सलमान, कमल हसन की ये 10 फिल्मे रिलीज़ हुई होती तो बॉक्स ऑफिस फाड़ कर रख देती.

फिल्मे सपनों की तरह होती हैं, दर्शक के लिए ऐसा सपना जो वो जी नहीं सका, फिल्म मेकर के लिए ऐसा सपना जिसे वो जीना चाहता है, दूसरों को दिखाना चाहता है. पर कुछ सपने ऐसे रहे जो देखे तो गए लेकिन दिखाएं ना जा सके या फिर जो बनने के क्रम में कैंसिल हो गया. ऐसे ही कुछ इनकंप्लीट या आंधी-अधूरी बनी इंडियन मूवी के बारे में हम आपको बताएंगे जिनका प्रोडक्शन किसी कारण वस पूरा नहीं हो सका, उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. यदि ये फिल्मे रिलीज़ होती तो बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा देती. तो आइए शुरू करते हैं सिलसिला.

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‘मिस्टर इंडिया’ बनाने वाले ‘शेखर कपूर’ 1992 में एक साइंस फिक्शन फिल्म बना रहे थे, नाम था ‘टाइम मशीन’ इसे हॉलीवुड मूवी ‘बैक टु फ्यूचर’ पर बेस्ड बताया गया. इस फिल्म में आमिर खान लीड रोल में थे, वह टाइम ट्रेवल के जरिए पास्ट में जाकर अपने पैरंट्स से मिलते हैं, उनके पेरेंट्स बने थे ‘नसरुद्दीन शाह’ और ‘रेखा’, ‘विजय आनंद’, ‘टाइम मशीन’ बनाने वाले साइंटिस्ट की भूमिका में थे. रवीना टंडन, अमरीश पुरी और गुलशन ग्रोवर भी इस फिल्म का हिस्सा थे. इस फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी थी, 10-11 रील्स भी तैयार हो चुके थे. कई रिपोर्ट में बताया जाता है कि ‘टाइम मशीन’ की 80 फ़ीसदी शूटिंग पूरी हो चुकी थी, मगर प्रोड्यूसर की पैसों की तंगी की वजह से फिल्म रुक गई, “उन्होंने कहा कि उनके पास जैसे ही पैसे आएंगे इस फिल्म को पूरा किया जाएगा”. मगर तमाम कोशिशों के बावजूद इस फिल्म को रिवाइव नहीं किया जा सका. फिर 2008 में हिंदुस्तान टाइम्स में एक रिपोर्ट छपी कहां गया शेखर अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘टाइम मशीन’ को रिवाइव करना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने यूटीवी से कोई डील भी की है. इस बार रणबीर कपूर, आमिर खान वाला रोल करेंगे पर ऐसा हो नहीं पाया, फिल्म अभी भी ठंडे बस्ते में है.

अमिताभ बच्चन की एक तिलस्मी पिक्चर 2009 के आसपास फिल्म प्लान हुई, विधु विनोद चोपड़ा इसके प्रोडूसर थे. ‘नीरजा’ बनाने वाले ‘राम माधवानी’ इसके डायरेक्टर थे. इसका 1:30 मिनट टीज़र भी रिलीज किया गया. योद्धा बने अमिताभ बच्चन युद्ध क्षेत्र में खड़े होकर कहते हैं “नो वार”. यह ‘देवकीनंदन खत्री’ के फेमस नावेल ‘चंद्रकांता’ का अडॉप्टेसन थी. बॉलीवुड लाइफ के अनुसार राम माधवानी और स्वानंद किरकिरे 14 पन्नो का एक ड्राफ्ट भी लिख चुके थे. कुछ पैसो की दिक्कत थी, कुछ विधु विनोद स्क्रिप्ट से संतुस्ट नहीं थे, इसलिए टीज़र आने के बाद भी फिल्म नहीं बन पाई.

कहते है ‘दस’ मुकुल आनंद का ड्रीम प्रोजेक्ट थी. 1996 के आसपास फिल्म का सूट भी शुरू हो गया था, सलमान खान और संजय दत्त आर्मी ऑफिसर के रोल में थे, रवीना टंडन नेगेटिव किरदार में थी, शिल्पा शेट्टी और विनोद खन्ना भी फिल्म में अहम् भूमिका निभा रहे थे. ‘दस’ राहुल देव के कैरियर की डेब्यू फिल्म होने वाली थी. पर मुकुल आनंद की सूट के दौरान ही मौत हो गई, इस कारण पिक्चर आगे बन नहीं सकी. हालांकि इसके म्यूजिक को मुकुल को ट्रिब्यूट देते हुए रिलीज़ किया गया. “सुनो गौर से दुनिया वालों” इसी फिल्म का गाना था. इस फिल्म में शंकर अहसान रॉय का ये पहला गाना था.

अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘आलिशान’ कुछ दिन के शूट के बाद बंद हो गई. 1988 में आई टीनू आनंद ने शहंशाह के लिए डिम्पल कपाडिया को साइन किया था, कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन की आपत्ति के बाद उन्हें फिल्म से हटाकर मीनाक्षी शेषाद्री को ले लिया गया, पर डिंपल साइनिंग अमाउंट वापस करने को तैयार नहीं थी. टीनू ने उन्हें अमिताभ के साथ दो फिल्मों में काम करने का ऑफर दिया, एक थी ‘महाकाल’ और दूसरी थी ‘आलिशान’ पर दोनों ही बन नहीं सकी. आलिशान के ना बनने के दो कारण थे पहला अमिताभ बच्चन और जावेद अख्तर दोनों ‘मै आजाद हूँ’ नाम की फिल्म करने चले गए. दूसरा कारन बताया गया के फिल्म की स्टोरी लीक हो गई थी, हालाँकि दोनों ही कारण उड़ती-उड़ती खबरे है.

लेट्स कैच वीरप्पन

2004 में टाइम्स ऑफ इंडिया में एक खबर छपी के राम गोपाल वर्मा वीरप्पन पर एक फिल्म लिख रहे है. ये तिन गाँव वालो की कहानी है. वो वीरप्पन को पकड़ कर सरकारी इनाम अपने नाम करना चाहते है, फिल्म की शूटिंग अगस्त में शुरू भी हुई, लेकिन अक्टूबर में फिल्म कीड़े नाम के वेबसाइट में छपी रिपोर्ट के अनुसार, “शूटिंग का पहला दिन था, उसी दिन वीरप्पन को मार दिया गया. राम गोपाल वर्मा की फिल्म की कहानी ही वीरप्पन को पकड़ने पर थी, अब वीरप्पन ही नहीं रहा तो उसे पकड़ा कैसे जाये. इसलिए फिल्म रोक दी गई.

‘हकीकत’ बनाने वाले डायरेक्टर टी. रामाराव 1984 में ख़बरदार नाम से एक फिल्म बनाने थे, ये अमिताभ बच्चन और कमल हासन की पहली फिल्म होती, लेकिन 16 रील शूट होने के बाद फिल्म बंद हो गई, इस फिल्म को अमिताभ बच्चन ने बीच में ही छोड़ दिया, कारण ये बताया गया की, अमिताभ को कमल हसन का रोल ज्यादा मजबूत लग रहा था. इस स्क्रिप्ट के अनुसार कमल हासन के कैरेक्टर को फिल्म मैं मरना था, इस वजह से कमल हसन का किरदार लोगों के बिच ज्यादा पैठ बना लेगा, सारी लाइट अमिताभ की जगह कमल को मिल जाएगी. इसलिए उन्होंने फिल्म से हाथ खीच लिया. फिल्म छोड़ने के हर्जाने के तौर पर अमिताभ बच्चन ने डायरेक्टर टी. रामाराव को उनकी आने वाली अगली फिल्म के लिए पहले से ही समय दे दिया.

कमल हसन की 1997 के आसपास एक और पिक्चर जो रिलीज नहीं हो सकी नाम था ‘लेडीस ओनली’ इसमें रणधीर कपूर लीड रोल में थे. शिल्पा शिरोडकर, सीमा विश्वास, हीरा राजगोपाल ने अहम् किरदार निभाए थे. यह तमिल फिल्म ‘मग्लिर मुट्टम’ का हिंदी रीमेक थी. हालांकि यह खुद एक अमेरिकन फिल्म ‘नाइन टु फाइव’ से इंस्पायर्ड थी. दिनेश शैलेंद्र इसके डायरेक्टर थे, यह एक ऑफिस में काम करने वाली तिन औरतो की कहानी है, वे अपने बॉस के शोषण से परेसान हो कर अपने बॉस का मर्डर करने का प्लान करती है. कमल हसन इसके प्रोडूसर थे, इसके साथ वह फिल्म में डेड बॉडी बने थे. फिल्म किसी कारण बस पूरी नहीं हो सकी

बॉर्डर बनाने वाले डायरेक्टर जेपी दत्ता अपनी पहली पिक्चर ‘सरहद’ नाम से बना रहे थे, ये भारतीय युद्ध बंदियों की कहानी थी. विनोद खन्ना और बिंदिया गोस्वामी लीड रोल में थे. यह मिथुन चक्रवर्ती की पहली पिक्चर हो सकती थी लेकिन फिल्म रिलीज नहीं हो सकी. कहा जाता है फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी लेकिन बीच में प्रोडूसर के पैसे खत्म हो गए, फिल्म रोक दी गई.

1995 में इंद्रकुमार दो नए फिल्मे शुरू करने जा रहे थे, पहली फिल्म थी ‘इश्क’ इसमें आमिर खान, जूही चावला, अजय देवगन और काजोल काम कर रहे थे, दूसरी फिल्म का नाम तय नहीं हुआ था, मगर मुहरत वगैरा तय हो चुका था. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, आमिर खान और माधुरी दीक्षित काम करने वाले थे. मीडिया में इस फिल्म का नाम रिश्ता दे दिया, जो कि संभवत इस फिल्म का टेनटेटिव टाइटल भी था. चर्चा ये थी की अमिताभ, इंद्रकुमार की इश्क में भी एक छोटा सा रोल करने वाले थे, उनकी आवाज में सुदेश भोसले ने फिल्म का एक गाना ‘मिस्टर लोवा-लोवा’ रिकॉर्ड भी कर लिया था मगर इन्दर को लगने लगा कि वे देश के टॉप स्टार्स को लेकर एक साथ दो फिल्में नहीं बना सकते इसलिए उन्होंने ‘रिश्ता’ को होल्ड पर डाल दिया. ‘रिश्ता’ कैसल होने के बाद इन्दर ने अमिताभ बच्चन के गेस्ट अपीयरेन्स को ड्रॉप कर दिया. रिश्ता के ना बनाने की असली वजह अमिरखान बताए जाते हैं, ऐसा कहा जाता है कि आमिर, अमिताभ बच्चन के सामने अपने हाइट को लेकर कांसियस हो रहे थे, उन्हें लग रहा था कि अमिताभ बच्चन जैसी लंबी चौड़ी पर्सनालिटी के सामने वे ठीक नहीं लगे. इसलिए आमिर उनके साथ रिश्ता में काम करना नहीं चाहते थे, और इसी वजह से फिल्म इश्क से भी उनका कैमियो हटा दिया गया.

1980 में मशहूर फिल्म मेकर बी आर चोपड़ा ने चाणक्य की कहानी पर एक फिल्म बनाने की घोषणा की, इस फिल्म का नाम था ‘चाणक्य चंद्रगुप्त’. फिल्म में चाणक्य का रोल दिलीप कुमार करने वाले थे, धर्मेंद्र को चंद्रगुप्त मौर्य के रूप में कास्ट किया गया था. इन दोनों के अलावा शम्मी कपूर, हेमा मालिनी और परवीन बॉबी इस फिल्म का हिस्सा थी, इस फिल्म को बनाने के सारी तैयारी हो चुकी थी मगर फिल्म मेकर फाइनेंशियल क्राइसिस का शिकार हो गए, बीआर चोपड़ा को मायूस हो कर ये फिल्म बंद करनी पड़ी.

इससे जुड़ा एक कमाल का किस्सा भी है, चाणक्य की तैयारी के लिए मेकअप आर्टिस्ट पंडारी दादा को लन्दन भेजा गया बेसिकली सारे जुगत इसलिए भिडाये जा रहे थे ताकि दिलीप कुमार को बिना बाल के स्क्रीन पर दिखाया जा सके, क्योकि दिलीप कुमार बाल साफ नहीं करना चाहते थे. ऐसे में पंडारी दादा लन्दन गए वहा उन्होंने ‘एनी स्पिएर्स’ नाम के मेकअप आर्टिस्ट के साथ मिल कर एक बोल्ड कैप डिजाईन की, जिसको दिलीप कुमार पूरी फिल्म में पहनने वाले थे, इससे वो पूरी फिल्म में गंजे नजर आते, बताया जाता है कि उस जमाने में इस विग को बनाने में लाखों रुपए खर्च हो गए, लेकिन तमाम तैयारी जाया हो गई. 

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